
रिश्ता पक्का होते-होते रुक गया — "लड़की मांगलिक है।" बस यही दो शब्द, और परिवारों की नींद उड़ जाती है। पर क्या मांगलिक होना सच में इतना डरावना है? आइए बिना डराए, शास्त्र की बात करते हैं।
जन्म कुंडली में मंगल जब लग्न से 1, 4, 7, 8 या 12वें भाव में बैठा हो, तो मंगल दोष (मांगलिक योग) बनता है। मंगल ऊर्जा, साहस और आक्रामकता का ग्रह है — विवाह के घर में इसकी उग्रता दांपत्य जीवन में टकराव ला सकती है। बस इतनी सी बात है।
भ्रांति 1: मांगलिक का विवाह मांगलिक से ही हो सकता है। — पूर्ण सत्य नहीं। कई स्थितियों में दोष स्वतः भंग होता है।
भ्रांति 2: मांगलिक जीवनसाथी के लिए घातक होते हैं। — शास्त्र ऐसा नहीं कहते। दोष की तीव्रता अंश, दृष्टि और युति पर निर्भर करती है।
भ्रांति 3: मंगल दोष का कोई समाधान नहीं। — है, और सदियों से प्रमाणित है: मंगलनाथ की भात पूजा।
उज्जैन का मंगलनाथ मंदिर मंगल ग्रह की जन्मभूमि माना जाता है। यहां पके चावल (भात) से मंगलनाथ महादेव का श्रृंगार होता है — मान्यता है कि शीतल भात मंगल की उष्णता को शांत करता है। पूरे भारत से वर-वधू पक्ष विवाह से पहले यह पूजा कराने आते हैं।
तो अगली बार कोई कहे "कुंडली में मंगल दोष है" — घबराइए मत। कुंडली दिखाइए, दोष की तीव्रता समझिए, और आवश्यक हो तो मंगलनाथ के दरबार में भात पूजा का संकल्प लीजिए।
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