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उज्जैन के प्रमुख मंदिर — अवंतिका दर्शन

सप्त मोक्षपुरियों में से एक अवंतिका नगरी — जहां हर गली में इतिहास और हर मोड़ पर आस्था है। उज्जैन आएं तो इन 12 पवित्र स्थलों के दर्शन अवश्य करें।

🛕 1. महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग

द्वादश ज्योतिर्लिंगों में तीसरा और एकमात्र दक्षिणमुखी शिवलिंग। बाबा महाकाल उज्जैन के राजा माने जाते हैं — मान्यता है कि नगर में कोई और राजा रात नहीं बिता सकता। प्रातः 4 बजे की भस्म आरती विश्व प्रसिद्ध है, जिसमें चिता भस्म से बाबा का श्रृंगार होता है।

🛕 2. मंगलनाथ मंदिर

पुराणों के अनुसार मंगल ग्रह की जन्मभूमि। मत्स्य पुराण में उज्जैन को मंगल की जननी कहा गया है। यह मंदिर कर्क रेखा पर स्थित है — प्राचीन खगोलविदों ने इसी स्थान से ग्रहों की गणना की थी। क्षिप्रा तट पर स्थित यह मंदिर शांत और दर्शनीय है।

🛕 3. काल भैरव मंदिर

उज्जैन के क्षेत्रपाल यानी नगर रक्षक। स्कंद पुराण के अवंति खंड में वर्णित यह मंदिर लगभग 6,000 वर्ष पुराना माना जाता है। यहां भगवान काल भैरव को मदिरा का भोग लगाया जाता है — पात्र में अर्पित मदिरा प्रतिमा के समक्ष विलुप्त हो जाती है, यह रहस्य आज भी अनसुलझा है।

🛕 4. हरसिद्धि माता मंदिर

51 शक्तिपीठों में से एक — यहां माता सती की कोहनी गिरी थी। सम्राट विक्रमादित्य की आराध्य देवी। मंदिर प्रांगण के दो प्राचीन दीप स्तंभ नवरात्रि में 1,011 दीपों से जगमगाते हैं — यह दृश्य अविस्मरणीय होता है।

🛕 5. सिद्धवट

क्षिप्रा तट पर स्थित अति प्राचीन वट वृक्ष — पार्वती जी द्वारा रोपित माना जाता है। प्रयाग के अक्षयवट, नासिक के पंचवट और गया के बोधिवट के समान पवित्र। पितृ कर्म और श्राद्ध के लिए भारत के सबसे प्रामाणिक स्थानों में गिना जाता है।

🛕 6. चिंतामण गणेश मंदिर

उज्जैन का सबसे बड़ा और प्राचीन गणेश मंदिर — स्वयंभू प्रतिमा। मान्यता है कि वनवास काल में सीता जी ने यहां पूजन किया था। चिंता हरने वाले गणेश — इसीलिए नाम चिंतामण। बुधवार को यहां विशेष मेला लगता है।

🛕 7. गढ़कालिका माता मंदिर

महाकवि कालिदास की आराध्य देवी। किंवदंती है कि मंदबुद्धि कालिदास को मां कालिका की कृपा से ही अद्वितीय काव्य प्रतिभा मिली। अवंति क्षेत्र की प्राचीनतम देवी पीठों में से एक।

🛕 8. संदीपनि आश्रम

जहां भगवान श्रीकृष्ण, बलराम और सुदामा ने महर्षि संदीपनि से 64 कलाओं और 14 विद्याओं की शिक्षा ली। आश्रम में आज भी वह अंकपात स्थल है जहां श्रीकृष्ण गिनती लिखा करते थे। शिक्षा आरंभ से पहले बच्चों को यहां लाना शुभ माना जाता है।

🛕 9. राम घाट

क्षिप्रा नदी का सबसे प्रमुख घाट — सिंहस्थ महाकुंभ का मुख्य स्नान यहीं होता है। संध्या समय की क्षिप्रा आरती मन मोह लेती है। मान्यता है कि भगवान राम ने पिता दशरथ का तर्पण यहीं किया था।

🛕 10. नवग्रह शनि मंदिर (त्रिवेणी)

क्षिप्रा-सरस्वती-खान त्रिवेणी संगम पर स्थित प्राचीन नवग्रह मंदिर। यहां शनिदेव स्वयं शिव रूप में विराजते हैं — ऐसा दुर्लभ स्वरूप अन्यत्र नहीं मिलता। शनिश्चरी अमावस्या पर यहां लाखों श्रद्धालु स्नान-दर्शन करते हैं।

🛕 11. मंगलनाथ के समीप — अंगारेश्वर महादेव

क्षिप्रा तट पर स्थित अंगारेश्वर महादेव — मंगल (अंगारक) से जुड़ा दूसरा प्राचीन स्थान। भौम प्रदोष पर यहां दर्शन का विशेष महत्व माना जाता है।

🛕 12. चौबीस खंभा माता मंदिर

महाकाल क्षेत्र का प्राचीन प्रवेश द्वार — 9वीं-10वीं शताब्दी के 24 पाषाण स्तंभों पर आधारित। द्वार पर महामाया और महालाया देवियां नगर की रक्षा करती हैं। पुरातत्व प्रेमियों के लिए विशेष दर्शनीय।

🚩 दर्शन यात्रा की जानकारी

महाकालेश्वर की भस्म आरती के लिए ऑनलाइन पूर्व-बुकिंग आवश्यक है। अधिकांश मंदिर प्रातः 5 से रात 9 बजे तक खुले रहते हैं। सोमवार को महाकाल, मंगलवार को मंगलनाथ और शनिश्चरी अमावस्या को नवग्रह शनि मंदिर में विशेष भीड़ रहती है — समय लेकर चलें।

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